योगेश

Saturday, July 31, 2010

क्या आपके पास इसका जवाब है?

कल रात सोया गहरी नींद मे, सपने मे आयी एक
नन्ही कन्या
बुझा चेहरा, भरी आँखे, जैसे पतझड का सूखा पत्ता
जब पूछा मैंने कौन हो तुम
वो बोली एक मुर्झाया फूल
पूछा मैने क्या तुम्हे है कोई गम
उत्तर सुनकर मेरी आँखे हो गई नम।
वो माँ जिसने पाला मुझे नौ मास
क्या नही थी मै उसके लिए खास
सीने से भी ना लगाया
कुछ देर भी ना सहलाया
ले गई सुनसान जंगल मे
फेंक दिया एक खाई मे
मुडकर भी ना देखा एक बार
अब क्या निकालूं अन्याय का सार?
क्या कन्या होना ही है दोष मेरा
या दोषी है ये समाज
क्या ऐसी होती है माँ?
क्यों सभी रहते है इस प्रशन पर मौन?
क्या कभी नहीं मिलेगा मुझे उत्तर
कि आखिर है दोषी कौन?

6 comments:

  1. मार्मिक ....ज्वलंत प्रश्न

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  2. मां नहिं दोषी, दोषी है ये समाज
    देगा तेरे हर आंसू का जवाब्।

    अन्तर्मन को हिला देती कविता।

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  3. अत्यन्त ही मार्मिक रचना है आपकी.
    मन भावुक हो उठा.

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  4. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

    मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

    यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

    शुभकामनाएं !


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  5. आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
    आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
    इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
    उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
    आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
    और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "हिन्दप्रभा" (Hindprabha) पर.
    यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


    वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

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